बिहार के गृह सचिव आमिर सुबहानी कहते हैं, "तलवारों की ऑनलाइन ख़रीद की
कोई जानकारी नहीं है. जुलूस का लाइसेंस देते समय हम ये शर्त लगा देते हैं कि कोई डीजे या ऐसे गाने नहीं बजाए जाएँगे. सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं
में कमी आई है और पहले के मुक़ाबले स्थिति बेहतर है."
लेकिन पिछले दो वर्षों में बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की कितनी घटनाएँ हुई हैं, इस बारे में उनका कहना था कि फ़िलहाल उनके पास कोई आँकड़ा नहीं है. बीबीसी के बिहार पुलिस से इस बाबत बार-बार संपर्क करने पर अधिकारियों ने सिर्फ़ इतना कहा कि स्थिति पहले से बेहतर है.
हालांकि इस साल अप्रैल में 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि जब से नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ दोबारा गठबंधन करके सरकार बनाई है, सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक़ 2012 में बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की 50 घटनाएँ हुईं, लेकिन 2017 में हिंदू-मुसलमान टकराव की 270 से ज़्यादा घटनाएं हुईं.
जबकि 2018 के पहले तीन महीनों में ही सांप्रदायिक हिंसा की 64 घटनाएँ बिहार में हुई थीं. रामनवमी के आसपास बिहार के जिन आठ ज़िलों में हिंसा हुई, वे थे- औरंगाबाद, नवादा, भागलपुर, रोसड़ा, मुंगेर, नालंदा, सिवान और गया.9 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और अयोध्या में राम मंदिर का मामला दोबारा गर्माया जा रहा है, ऐसे में नवादा से सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बढ़-चढ़कर बयान दे रहे हैं.
गिरिराज सिंह का ताज़ा बयान है, "72 साल से जब से कोर्ट में केस गया. कई दशक हो गया और कोर्ट निर्णय नहीं ले रहा है. ये सब्र की सीमा पार कर रहा है. हिंदू शालीन है, इसका ये मतलब नहीं है कि उसके सब्र की परीक्षा ली जाए. अब हिंदुओं का सब्र विस्फोटक होने की स्थिति में आ गया है".
साथ ही उन्होंने इलाहाबाद का नाम बदले जाने के बाद ये सलाह दे डाली कि बिहार में भी मुग़लों से जुड़े शहरों के नाम बदले जाने चाहिए.
यही नहीं बीजेपी नेताओं के इन विवादित बयानों से विहिप और बजरंग दल जैसे संगठनों को संजीवनी मिल रही है. उनके "हिंदुओं को अपमानित" किए जाने के दावे तेज़ होते जा रहे हैं और हिंदुओं में गुस्सा भरने की कोशिश साफ़ दिखती है.
नवादा में विहिप के नेता कैलाश विश्वकर्मा और बजरंग दल के नेता जीतेंद्र प्रताप जीतू से जेल में मिलकर गिरिराज सिंह ने विवाद खड़ा कर दिया था. अब ये दोनों जेल से ज़मानत पर छूट चुके हैं.
वे गिरिराज सिंह की प्रशंसा करते नहीं अघाते. कैलाश विश्वकर्मा कहते हैं कि गिरिराज सिंह ने कोई ग़लत काम नहीं किया.
लेकिन यह पूछे जाने पर कि गिरिराज सिंह अगर जनप्रतिनिधि हैं, तो उन मुसलमान पीड़ितों से मिलने क्यों नहीं गए जिनकी दुकानें जलाई गई हैं, इस पर वे कहते हैं, "मुस्लिम दोषी हैं, इसलिए दोषियों से नहीं मिलना है."
वे साफ़ कहते हैं कि उनके संगठन में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं हैं. उन्होंने कहा, "संगठन में मुसलमानों को नहीं रखने का कारण ये है कि उनकी सोच अलग है. हमारी सोच अलग है. हम गौ की पूजा करते हैं, वो गौ की हत्या करते हैं."
समस्तीपुर के पास रोसड़ा में आरएसएस का जलवा है. आरएसएस में रोसड़ा के ज़िला मंत्री अर्धेंदु श्री बब्बन कहते हैं कि उन्हें हिंसा से परहेज़ नहीं है, "अहिंसा परमो धर्म: लेकिन धर्म की रक्षा के लिए हिंसा उससे भी बड़ा धर्म है. जब हम पर कुठाराघात होता है, तो हम उसकी रक्षा करते हैं."
पटना सिटी इलाक़े में नवरात्रि की धूम के बीच अपने घर पर हमें मिले विहिप के प्रांतीय मंत्री नंदकुमार को लोकतंत्र की चिंता है. वे कहते हैं, "भारत हिंदू बहुल रहेगा, तभी लोकतंत्र रहेगा. भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है, मुसलमान भी. भारत की पहचान राम से है, गंगा से है, गीता से है."
लेकिन पिछले दो वर्षों में बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की कितनी घटनाएँ हुई हैं, इस बारे में उनका कहना था कि फ़िलहाल उनके पास कोई आँकड़ा नहीं है. बीबीसी के बिहार पुलिस से इस बाबत बार-बार संपर्क करने पर अधिकारियों ने सिर्फ़ इतना कहा कि स्थिति पहले से बेहतर है.
हालांकि इस साल अप्रैल में 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि जब से नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ दोबारा गठबंधन करके सरकार बनाई है, सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक़ 2012 में बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की 50 घटनाएँ हुईं, लेकिन 2017 में हिंदू-मुसलमान टकराव की 270 से ज़्यादा घटनाएं हुईं.
जबकि 2018 के पहले तीन महीनों में ही सांप्रदायिक हिंसा की 64 घटनाएँ बिहार में हुई थीं. रामनवमी के आसपास बिहार के जिन आठ ज़िलों में हिंसा हुई, वे थे- औरंगाबाद, नवादा, भागलपुर, रोसड़ा, मुंगेर, नालंदा, सिवान और गया.9 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और अयोध्या में राम मंदिर का मामला दोबारा गर्माया जा रहा है, ऐसे में नवादा से सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बढ़-चढ़कर बयान दे रहे हैं.
गिरिराज सिंह का ताज़ा बयान है, "72 साल से जब से कोर्ट में केस गया. कई दशक हो गया और कोर्ट निर्णय नहीं ले रहा है. ये सब्र की सीमा पार कर रहा है. हिंदू शालीन है, इसका ये मतलब नहीं है कि उसके सब्र की परीक्षा ली जाए. अब हिंदुओं का सब्र विस्फोटक होने की स्थिति में आ गया है".
साथ ही उन्होंने इलाहाबाद का नाम बदले जाने के बाद ये सलाह दे डाली कि बिहार में भी मुग़लों से जुड़े शहरों के नाम बदले जाने चाहिए.
यही नहीं बीजेपी नेताओं के इन विवादित बयानों से विहिप और बजरंग दल जैसे संगठनों को संजीवनी मिल रही है. उनके "हिंदुओं को अपमानित" किए जाने के दावे तेज़ होते जा रहे हैं और हिंदुओं में गुस्सा भरने की कोशिश साफ़ दिखती है.
नवादा में विहिप के नेता कैलाश विश्वकर्मा और बजरंग दल के नेता जीतेंद्र प्रताप जीतू से जेल में मिलकर गिरिराज सिंह ने विवाद खड़ा कर दिया था. अब ये दोनों जेल से ज़मानत पर छूट चुके हैं.
वे गिरिराज सिंह की प्रशंसा करते नहीं अघाते. कैलाश विश्वकर्मा कहते हैं कि गिरिराज सिंह ने कोई ग़लत काम नहीं किया.
लेकिन यह पूछे जाने पर कि गिरिराज सिंह अगर जनप्रतिनिधि हैं, तो उन मुसलमान पीड़ितों से मिलने क्यों नहीं गए जिनकी दुकानें जलाई गई हैं, इस पर वे कहते हैं, "मुस्लिम दोषी हैं, इसलिए दोषियों से नहीं मिलना है."
वे साफ़ कहते हैं कि उनके संगठन में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं हैं. उन्होंने कहा, "संगठन में मुसलमानों को नहीं रखने का कारण ये है कि उनकी सोच अलग है. हमारी सोच अलग है. हम गौ की पूजा करते हैं, वो गौ की हत्या करते हैं."
समस्तीपुर के पास रोसड़ा में आरएसएस का जलवा है. आरएसएस में रोसड़ा के ज़िला मंत्री अर्धेंदु श्री बब्बन कहते हैं कि उन्हें हिंसा से परहेज़ नहीं है, "अहिंसा परमो धर्म: लेकिन धर्म की रक्षा के लिए हिंसा उससे भी बड़ा धर्म है. जब हम पर कुठाराघात होता है, तो हम उसकी रक्षा करते हैं."
पटना सिटी इलाक़े में नवरात्रि की धूम के बीच अपने घर पर हमें मिले विहिप के प्रांतीय मंत्री नंदकुमार को लोकतंत्र की चिंता है. वे कहते हैं, "भारत हिंदू बहुल रहेगा, तभी लोकतंत्र रहेगा. भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है, मुसलमान भी. भारत की पहचान राम से है, गंगा से है, गीता से है."
No comments:
Post a Comment